हर किसी ने मेरे दिल का तार तोड़ा हैं
अब तो दर्दों से मैने दिल का साज जोड़ा हैं ।
सबको तो प्यार नसीब हुआ
हमको तो जख्मे दुआए मिला
गैर तो गैर अपनो का भला हुआ
जिसने दिल से नफरत जोड़ा हैं
हर किसी ने मेरे दिल का तार तोड़ा हैं
हंसते हैं अब वे झूठी अदा दिखाने को
कसम खाते हैं मुहब्बत वफ़ा जताने को
ऐसे बेदर्द जमाने का क्या कहना
जख्में दिल पे पत्थर मार जाते हैं
हर किसी ने मेरे दिल का तार तोड़ा हैं
ख़ालिस में भी हाथ जोड़ा हैं
दर्द तो दर्द मुहब्बत में भी आंसू मिले
फूल में कांटे होंगे न मालूम हमें
अब कांटे भी लगने लगे प्यारे हमे
हो उन्हें फूल मुबारक
जो कांटो में हमे छोड़ा हैं
हर किसी ने मेरे दिल का तार तोड़ा हैं ।।

