ग़ज़ल
बनके आये हो जीवन हमारे लिए,
जिन्दगी अपनी कुर्बा तुम्हारे लिए।
मैं भुला दूं तुम्हे ऐसा होगा नही,
सारी दुनिया भूला दूं तुम्हारे लिए।
आइए छोड़ दीजे ये शर्मो हया,
हम हैं पलकें बिछाएं तुम्हारे लिए।
सामने हर घड़ी तेरी तस्वीर है,
आईना बन गए हो हमारे लिए,
इम्तेहां मेरा जब चाहो ले लो सनम,
सर खुशी से कटा दूं तुम्हारे लिए।
~ शिवसागर "सहर"


