स्वयं के नष्ट होने के बाद भीप्रेम कभी मरता नहींवो दब जाता हैमिट्टी में,फ़िर उत्खनित किया जाता हैसदियों बादकिसी प्राचीन सभ्यता के रूप मेंऔर महफ़ूज़ हो जाता हैपुरातात्विक साक्ष्य के तौर परहमेंशा के लिए।