मारोगे, हथौड़े से, मेरे टुकड़े बना दोगे। टूट कर के, चूर हो कर, मैं बिखर जाऊंगा। मै मगर , इन्सान सा, बहुरुपिया नहीं। मै यहां, हर हाल मे, पत्थर ही कहाऊँगा ।।