मैं नहीं रुकता यही मेरी नियति है चाहता हूँ साथ मेरे तुम चले आओ। बाँध लो मुझको बनाने के लिए खुद को या मुझे जाने दो यू ही व्यर्थ मे चाहता हूं तुम मुझे यूं न मिटाओ। अक्स मेरा है तू मैं तेरा वजूद हूँ फिर भला कैसे रहेगा छोड़ कर मुझको चाहता हूँ खुद को न ऐसे सताओ। मैं समय हूँ और तेरी जिन्दगी भी हर जनम मे दोस्ती मेरी तुम्हारी चाहता हूँ दोस्ती हँस कर निभाओ। मैं नहीं रुकता यही मेरी नियति है चाहता हूँ साथ मेरे तुम चले आओ ।।