उसने अपनी बगिया का एक फूल मुझे भी तोड़ दिया। बोला ईसको ले जा तू भी यह ऐसी सुगंध फैलायेगा जग महक उठेगा खुशबू से चहूँ ओर महकता जायेगा। लेकर उसको अपने घर के आँगन मे मैंने रोप दिया। ऐसा भी नहीं कुछ किया नही पानी दी पर कीचड़ से भरा हवा मिली उसको लेकिन शायद जहरीली गैस भरी कुछ खाद्य तत्व भी पाया पर अम्ल भरा। लेकिन वह मरा नहीं एक दिन खिल ही उठा कितना सुन्दर कितना प्यारा लेकिन उसकी खुशबू ? छी: बदबू भी वैसी न होती होगी मैं दूर हट गया फिर सोचा लगता है उसका कथन कभी सत्य नहीं हो पायेगा ।।