Bebasi(बेबसी)


मेरी आवाज़ सुनोगे क्या

मेरा दर्द पढ़ोगे क्या

मैं आम इंसान हूँ.........

तुम मेरी ज़मी से जुड़ोगे क्या


तुम मुझसे आकर मिलोगे क्या

मुझसे बाते करोगे क्या

मैं रहता हूँ इन सकरी गलियों में

तुम नंगे पाँव चलोगे क्या


टूटी इन दीवारों से 

तुम भी बाते करोगे क्या

जो बारिश भी न रोक सके 

ऐसे छत के नीचे रहोगे क्या


सफ़ेद रंग के चोले में

तुम मेरे साथ चलोगे क्या

अंगारो की भठ्ठी से

तुम लोहा बन के लड़ोगे क्या


आसा रूपी दीपक सा

घर घर तुम भी जलोगे क्या

हालातों की बेड़ी से

तुम हमको मुक्त करोगे क्या


इतने वर्षों बाद मिले हो

ऐसे ही तुम मिलोगे क्या

तुम तो छपते अखबारों में

मेरी आवाज़ बनोगे क्या


Writer

Shivendra jamwal