ऐ मोहब्बत तेरा मक़ाम क्या है

मैं इश्क़ हूँ मेरा इलाज़ क्या है


ख़्वाबों के गुलिस्ते में गुल है तेरा

महके जो तू तो पहरेदार क्या है


दीदारे हुस्न का बहाना ढूढ़ता है जमाना

तेरे महकमें में मेरा दर्दे चिराग़ क्या है


दस्तारख मोहब्बत का जानता हूँ मै

भुल गया जो खुद को तो मेरा कुसूर क्या है


सामो-शहर आशिक़ ढूढते है तेरे

बा-मुश्किल न हो तो तेरा फितूर क्या है


लफ्ज़ भी इंतेज़ार में ठहरे है तेरे

जो चाँद में गुरूर न हो तो चाँद क्या है


मान बैठा इश्क़ ने ख़ुदा जिन्हें

जो मोहब्बत ही न हो तो मेरा वजूद क्या है