महबूब ने कुछ ऐसा किया प्यार की इबादत में,

इश्क़ का भाव गिर गया जिस्म की चाहत में।




वो कहती थी मुझे तुम्हें खोने का डर है,

सच समझा मैने, बोली कह दिया शरारत में।




कान खोल के सुन लो बगावत वालों,

जमानत नहीं मिलेगी दिल की अदालत में।




वकील बहुत बनाएं उसने मुकदमा सुलझाने के लिए,

मगर कोई गवाह नहीं मिला जमानत में।




जो पैगाम-ए-वफा का दर्द जीते हैं 'शिवचरण' उनसे सीखो,

धोखा खाने वाला ही संभलता है इश्क़ की कयामत में।।







-कवि शिवचरण सदाबहार