क्यूँ आयी हो तुमफिर दर्द का फ़साना लेकर,भरा नहीं क्या तुम्हारा दिलइस रैयत का खजाना ले कर..
क्यूँ आयी हो तुमफिर दर्द का फ़साना लेकर,
भरा नहीं क्या तुम्हारा दिलइस रैयत का खजाना ले कर..