खुश थे हम उनके हाथों का अख़बार बनकर ,

हमें पढ़ते थे वो कभी जरूरी समाचार समझकर ,

मग़र भूल गए कि क़ीमत ज़्यादा मिलने पर हक़दार बदल जाया करते है ,

हर सुबह उनकी हाथों के अख़बार बदल जाया करते है.....


~ शिवांश #urstrulyShivu