खुश थे हम उनके हाथों का अख़बार बनकर ,हमें पढ़ते थे वो कभी जरूरी समाचार समझकर ,मग़र भूल गए कि क़ीमत ज़्यादा मिलने पर हक़दार बदल जाया करते है ,हर सुबह उनकी हाथों के अख़बार बदल जाया करते है.....
खुश थे हम उनके हाथों का अख़बार बनकर ,हमें पढ़ते थे वो कभी जरूरी समाचार समझकर ,
मग़र भूल गए कि क़ीमत ज़्यादा मिलने पर हक़दार बदल जाया करते है ,हर सुबह उनकी हाथों के अख़बार बदल जाया करते है.....