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"इश्क में तेरे"


इश्क में तेरे अब मेरा क्या हाल हो गया,
जीने लगा अब मैं,
वाह क्या कमाल हो गया,
अजनबी,अनजान,अजीबोगरीब था पहले मैं,
अब तेरे इश्क-ए-रहमतों से मैं मजबूत ढाल हो गया,
न ही नींद,न ही ख्वाब आते थे पहले मुझे,
अब तो तेरे रंगीन खयालातों से मालामाल हो गया,
बेअसर,बेढंग,बेरंग था बहुत पहले मैं,
अब तो तेरे इश्क-ए-असर का रंग गहरा लाल हो गया,

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