"गाँववाले मना करते हैं जाने से उस पास वाले जंगल में कहते है वहां दानव रहता है जो बच्चों की आवाज़ हमेशा के लिए छीन लेता है तुम भी वहाँ मत जाना!" सुगना की ये बचकानी बात सुनकर मैं अपनी हँसी नहीं रोक पायी और कहा "एक साल में एक ही बार तो आना होता है उसमें भी ये बचकानी कहानियाँ सुनने को मिलती है, दानव-राक्षस जैसा कुछ नहीं होता।" खेत से घर तक का आधा रास्ता तो उसे समझाने में ही निकल गया।

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तभी एक चाचा दिखे जो अपनी बच्ची को गोद में उठाए, रोते- रोते वैद्य जी के घर की ओर भाग रहे थे। हम दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा और दौड़ने लगे उनके पीछे

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वहाँ पहुँचकर हमने किसी तरह खिड़की से झांकने की कोशिश की अंदर चाचा हाथ जोड़े खड़े थे और उनकी बच्ची वहीँ बेहोश पड़ी थी उसे देखकर सुगना ने कहा "दीदी इसकी आवाज़ भी दानव ने छीन ली होगी।" मैंने उसे चुप कराते हुए बोला "ऐसा कुछ नहीं है खेलते वक्त लग गई होगी" फ़िर ध्यान से उस बच्ची को देखने लगी, उसकी फ्रॉक खून से एकदम सनी हुई थी।

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कुछ देर बाद वैद्य जी ने जांच के लिए फ्रॉक ज़रा ऊपर की तो, उसके पैरों के बीच से खून बहता नज़र आ रहा था। वो खून देख कर मुझे एहसास हुआ कि सुगना ग़लत नहीं थी

दानव असलियत में होते हैं।

~शिवानी