आँखों की खामोशियाँ छुपा कर रखा करो

कोई पढ़ न ले इन्हें काजल लगा कर रखा करो


सब फूल गुलदान मेें ही क्यों रखती हो?

इक गुलाब बालों मेे सजा कर रखा करो


मुझसे ज़्यादा तो तुम ये आईने देखती हो

इन बेजान रकीबों को उलटा कर रखा करो


तुम नाराज़ हो क्या मेरी किसी बात पर?

अब कहती नहींं, कपड़े जमा कर रखा करो


ये शहर भरा पड़ा है दह्शत्गर्दो से, यहाँ

लोगों‌‌ से अपना बचपना बचा कर रखा करो