कुछ अलग है



वो बात कुछ अलग है,वो मुलाकात कुछ अलग है, 

जिसे याद करके ही शर्मा जाएं उसकी याद कुछ अलग है,

वो आवाज़ कुछ अलग है, वो एहसास कुछ अलग है और

जो समझ नहीं आते,वो हालात कुछ अलग है ।


यूं तो नजरें बहुत हैं हमें भी ताकने वाली पर उसकी बात कुछ अलग है,

जहां नाउम्मीदी में भी उम्मीद नज़र आए उसका आगाज़ कुछ अलग है, 

जिन्हें खुद से भी जा़हिर ना कर पाऊं वो जज़्बात कुछ अलग है, 

और जनाब, जिसका इज़हार ना हो पाए उस इश्क के अल्फाज़ कुछ अलग है।

                   - शिवानी कुकरेती