वक्त गुजरता गया हम बढे होते गए
वक्त गुजरता गया हम बढे होते गए
अब शरारतों की जगह जिम्मेदारीयों ने लेली
और नासमझी की जगह समझदारीयो ने लेली
वक्त गुजरता गया हम बढे होते गए
किसी कि उम्मीद पर जीने वाले अब दुसरो की उम्मीद बनने लगे
हमेशा बेबाक से बोलने वाले अब मोन ही रहने लगे
वक्त गुजरता गया हम बढे होते गए
जरा सी चोट पर रोने वाले अब जख्म गहरे सहने लगे
बड़ी - बड़ी फरमाइशें करने वाले अब शोक अपने खोने लगे
वक्त गुजरता गया हम बढे होते गए
और इन सब मे नही बदला तो माँ कि ममता, पिता का प्यार
ये दुनिया की बेरूखी, इन जिम्मेदारीयों का गठ्ठर
ये वक्त के साथ और बढता गया
वक्त गुजरता गया हम बढे होते गए


