ये रिश्तौ की उलझनें या उलझनें जिन्दगी की

ये खामोशीयो का साया , ये उदासीयो का मन्जर

यु लोगों का आपस में लडना - झगडना

बिना समझे एक - दुसरे के जज्बात को अपनी ही

कहना ओर कहते ही जाना

अपनों का पराया सा लगना कभी

सिर्फ अपने ही आप से बात किये जाना

क्या खत्म होगा ये सब कभी या युहीं चलती रहेगी जिन्दगी |

ये रिश्तौ कि उलझनें या उलझनें जिन्दगी की

ये उम्मीदें ढेर सारी मेरी तुमसे ओर तुम्हारी मुझसे

हम दोनों का घुट- घुट के जीना कभी

ये दद भरी चीखें ये रोते - बिलखते लोग

आखों से आसुओं की बाढ कभी

क्या खत्म होगा ये सब कभी या युहीं चलती रहेगी जिन्दगी |