तुम ही कहो मैं क्या करूँ
रोऊ जी भरकर या बेपनाह हसुंं
जो मिला है उसका शुकिया अदा करूँ
या जो ना मिला उसकी शिकायतें खुदा से करूँ
तुम ही कहो मैं क्या करूँ
जीलु अपनी जिंदगी या
औरों कि भी परवाह करूँ
तुम ही कहो मैं क्या करूँ
जिंदगी के इन तुफानो का डटकर सामना करूँ
या सिमट कर एक कोने में तुफां के जाने का इन्तजा करूँ
तुम ही कहो मैं क्या करूँ


