अब इसांन ही इसांन से खफा सा लगता है

कहता हर वक़्त गम ही गम है मेरे पास ,

मगर हर वक़्त वो खुशी से दुर भागता सा लगता हैं

अक्सर भीड़ में होकर भी वो तन्हा सा लगता है

अब इसांन ही इसांन से खफा सा लगता है

उसकी आँखों में ख्वाहिशें तो हज़ार है, पर वो किसी मन्ज़िल की तलाश में भटकता सा लगता है

अब वो अपने ही अन्दर घुटता सा लगता है

अब इसांन ही इसांन से खफा सा लगता है|