तुझे हर बार खुद से आगे रखा
तेरी राह पर अपनी हर राह मेने बदली
मेरी हजारों ख्वाहिशों को दफन भी किया
मगर शायद........................
तुम्हे हर बार आगे रखने के मेरे ख्याल को
तुमने मेरी कमजोरी समझ लिया
तुम्हें लगा कि शायद में तुम्हारे बिना पूरी नही
हाँ नही हु............... नही हु में तुम्हारे बिना पुरी
मगर क्या तुम मेरे बिना हो???
ये सवाल खुद से करना कभी
अब रखती हु दोनों को बराबर
कुछ तुम्हारी और कुछ मेरी ख्वाहिशें
एक साथ पुरी करने की कोशिश किया करती हु


