
कभी- कभी जब आसमां को देखती हु तो लगता है जेसे चांद हमे देख रहा है
हमसे बात करना चा रहा है बाटना चा रहा है उसकी और हमारी तनहाइयों को
इन रात के अंधेरों मे लिपटी हुई खमौशिय़ौ से परेशान चांद बात करना चा रहा है
हम सब ऐसे ही तो है भी
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