उस लड़के ने बड़ी सरलता से कहा कि,

"कब तक इसी शहर में पड़ी रहोगी, दुनिया बहुत बड़ी और जिंदगी बहुत छोटी है चारदीवारी में बंद रह जाने के लिए, घर से दूर निकलो कमाने के लिए, नये शहरों से वाक़िफ़ होगी तब जाकर पता चलेगा कि वास्तव में जिंदगी जीना क्या होता है";

लड़की ने तिरछी निगाह करके अकड़ के कहा,

"तुम्हे क्या पता कि कितना कठिन है एक लड़की के लिए यह फैसला करना, घर से निकल जाना अपने सपनों की और सरल थोड़ी है, अपने मन का करना और समाज की बातों को नजरअंदाज कर देना बहुत हिम्मत का काम है ।"

तभी लड़के ने मुस्कुराकर कहा,

"हा यह भी सही है, मगर आजकल की लड़कियां कमज़ोर नहीं, देखा है मैंने तुम्हें कितने ही जटिल फैसलों को लेते हुए उसी तरह जितनी सरलता से तुम अपने बालों को क्षण भर में बांध लेती हो, छत की मुंडेर पर खड़ी बेखौफ सी जब आसमान को देखती हो, फिर यह कहना एक बहाना ही होगा की इतना सरल थोड़ी है जीवन को अपने ढंग से जीना!!"