विंध्याचल में 'माँ' तो अयोध्या में 'रामलला' का बसेरा है,
मथुरा में श्याम तो काशी में शिव का डेरा है।
यहां दरगाह-ए-साबिर और देवा शरीफ़ बसते हैं,
मशहूर लखनऊ कि चिकनकारी और चुनार के इमाम दसते हैं।
यहाँ के दस्तरख़ान को देख मुँह में पानी आना लाज़मी है,
अमां यहीं से मज़रूह सुलतानपुरी और कैफ़ी आज़मी हैं।
चूड़ियों में फ़िरोज़ाबाद और इत्र में कन्नौज का नाम है,
रोशनी में डूबी यहां अवध की हर शाम है।
कहीं हिंदी उर्दू से मिलती है तो कहीं त्रिवेणी का संदेश है,
मेरे देश के उत्तर में एक संगम का प्रदेश है।