ख़ुद को प्रोत्साहित करना है तो, अपने आस पास कि प्रकृति देखिये, सब कुछ आपके साथ ही है, बस आप आगे निकलने की दौड़ में, सब पीछे छोड़ना चाहते है, और जब आप यह नही कर पाते तो होती है पीड़ा, और जन्म लेता है अवसाद ।
बस यही कविता का परिचय है। #shivkiang
अच्छा चलो देखो ख़ुद के आस पास एक बार,
क्या कोई पराया है यहां, सब अपने ही तो है।
तो क्या बैर पालना...
और,
क्या कोई अपना है यहां, सब पराये ही तो है।
तो क्या प्रेम पालना...
एक नज़र यह भी है कि,
कितना कुछ है, संसार है, सुंदर है, पर शून्य भी तो है यही,
सब पूरे हैं पर अधूरे भी तो हैं सभी।
मुझे तो बस कोई इतना बता दे,
कोई इंसान, कोई रिश्ता या कोई चीज़ लेकर जा पायेंगे हम
अपने आख़िरी सफर पे ?
क्या हम अपनी आख़िरी दूरी इनके साथ तय कर पायेंगे ?
मेरे पास भी है एक जवाब अपने ही सवाल का...
बताती हूँ,
मैं अपनी आख़िरी दूरी तय करना चाहूंगी,
उन सारी लाल, पीले, नीले, हरे, नारंगी रंगो भरी तितलियों के साथ, जिन्होंने मिलकर मेरे जीवन मे प्रेम के इंद्रधनुष बनाये,
उस बहते हुए पानी की छुअन को, जिसे छूकर मैं अपनी रूह को छू सकी,
सूरज की वो हर किरण जो तुमसे और मुझसे टकराकर कहती है,
कि तुम हो...
कि तुम हो...
तुम हो...
©shivkiang


