दर्द भरा इन आँखों में
मै लिए चला तराने इन आँखों पर,
कुछ उठे प्रीत को पीठ दिखा कर
तो कुछ गिरे उसी के हाथों पर,
मैंने पूछा आंसू से
क्यों रोते हो तुम उसके जाने पर,
दर्द भरा इन आँखों में
मै लिए लिए चला तराने इन आँखों पर।
शून्य से कुछ शुरू हुआ
और पंहुचा सौ के आनें पर
एक लालसा थी आँखों में
जो अमर हुई उसके यूं मुड जाने पर।
ना मृत हुआ ना जीवित है
कैसा ये कृत उत्पन्न हुआ
उसके दिल में बस जाने पर ।
आज फ़ाग मास की की बेला भी,
सावन की मस्त फुहार बनी
उसके यूं स्वप्न में आ जाने पर।
कृतग्य हुआ में धन्य हुआ
आँखों में आँसू आने पर।।
