आजादी

तुम थी गाँधी का अरमान कोई,

तुम थी भगत सिंह का खवाब कोई,

तुम थी खुला आसमान कोई,

तब था वतन भारत कोई,

ना हिंदु था ना मुसलमान कोई,

तुम मिलीं तो लगा अब ना करेगा मजदूरी कोई,

अब पढें लिखो की चाय की दुकानें कई,

तुम चंद्रशेखर आजाद वाली आजादी नहीं,

यहाँ बच्चे करते मजदूरी कई,

तुम मिलीं तो जश्न कई हुए,

मत भूलो दो टुकड़े तभी हुए,

कितने शहीद, कितने कत्ल हुए,

और कितने कत्ल करा दिये,

अच्छे दिन के शोर ने,

बच्चो को गलत इतिहास पढाया,

दरबारियों के मोर ने,

यहाँ कितने हिंदु कितने मुसलमान है,

क्या यही भारत महान है?,

✍शिवम