न हमें उनसे इश्क़ की ख्वाहिश थी , न उन्हें हमारेें दर्द का अंदाजा था, दर्द तो आज भी है हमारे दिल में, पर उनका इश्क़ ही तकाज़ा था।
न हमें उनके हुस्न से मोहब्बत थी, न उन्हें हमारे सूरत से नफरत थी, पता नही ये इश्क़ क्या है जालिम, उनके आँखों से ही इबादत थी।


न हमें उनसे इश्क़ की ख्वाहिश थी , न उन्हें हमारेें दर्द का अंदाजा था, दर्द तो आज भी है हमारे दिल में, पर उनका इश्क़ ही तकाज़ा था।
न हमें उनके हुस्न से मोहब्बत थी, न उन्हें हमारे सूरत से नफरत थी, पता नही ये इश्क़ क्या है जालिम, उनके आँखों से ही इबादत थी।