राहत में था एक ज़माना,
अब जमाने में कहां राहत है।
बदल जाते ऐसे ही अब मौसम,
ए दुनिया क्या है तेरी रसम,
खाऊं क्या तेरी झूठी कसम।
बार बार इतना तू न बदल,
मेरा बचपन लौट आएगा,
फिर तुझे झूठी मुस्कान कौन दिखाएगा।
बारिश में आंसू छुप जाते हैं,
ठंड में जम जाते है,
ग्रीष्म में सुख जाते है,
तेरे मौसम मेरे गम पर भी राज़ कर जाते है।
नफ़रत होगायी है तेरी इस आगे बढ़ने की आदत से,
चल अब लौट चल इबादत से।
रास्ता जो तू भूल गया हो,
अच्छी यादों को तू पूछ लेना। रास्ते में जो तू हुआ शहीद,
निकलेगी बारात बुरे यादों सहित।
