ऐ ज़िन्दगी, तेरी इन मगरूरियों का चुन चुन कर हिसाब करूंगा , कुछ देर से ही सही लिख लिख कर तेरा ज़र्रा ज़र्रा साफ करूंगा। आज कर ले हुक़ूमत तेरा दौर है, जिस रोज़ राबता हुए तेरी इक हसीन नब्ज़ से, लिख कर ले ले तेरा नामोनिशान ज़िन्दगी से साफ करूंगा।। ऐ ज़िन्दगी, तेरी इन मागरूरियों का चुन चुन कर हिसाब करूंगा। अाज न मंज़िल का पता है राहें भी लापता हैं जिस रोज़ मुकम्मल हुए मंज़िल-ए-राह से, राहों के इन पत्थरों को ,इस दुनिया से बेकदर साफ़ करूंगा। लिख कर ले ले तेरा नामोनिशान अपनी ज़िन्दगी से साफ करूंगा। तेरी इन मागरूरियों का चुन चुन कर हिसाब करूंगा। आज तेरा दौर है , चलते चलते फिज़ाओं में अंधेरों का एहसास करा रहा है, राहों पर चलते चलते इक इक पैसों का हिसाब करा रहा है , ये जो पैसों का खेल मुसलसल मेरी ज़िन्दगी से खेले जा रहा है । याद रख , हिसाब करूंगा। इन काली घटाओं को भी साफ करूंगा। तेरे बही खातों का भी हिसाब करूंगा। ऐ ज़िन्दगी, तेरी इन मागरूरियों का चुन चुन कर हिसाब करूंगा। आज तेरा दौर है तू ख़ुद का झूठा स्वाभिमान दिखा रहा है, मेरे मां बाप का झुकता अभिमान दिखा रहा है याद रख ये सारा सबकुछ साफ़ करूंगा, तुझ पर भी राज़ करूंगा, तेरे जमाल ए रुख़ को बर्बाद करूंगा । ऐ ज़िन्दगी, तेरी इन मगरूरियों का चुन चुन कर हिसाब करूंगा , तेरी इन मगरूरियों का चुन चुन कर हिसाब करूंगा ।।


