Poetry 1 min read 431.2K reads

नहीं लिखूंगा।


मैं नहीं लिखता हूं किसी के लिए, ना ही लिखूंगा किसी के लिए।मैं तो अपने ज़हन का सैलाब उतार देता हु इन लफ्ज़ों में।

जाने कितने तूफान दफनाए घूम रहा हु। जाने कितने सैलाब दफनाए घूम रहा हु।इस छोटे से कैदखाने में।

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