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तू चल,जब तक चल सके!

Shivam Ved MishraShivam Ved Mishra September 28, 2022
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तू चल,जब तक चल सके।

संघर्ष के शिला को रगड़, जब तक आग न जल सके।

मैं भी राही हूं, अपने ज़मीर का इस समय।

देखते है ये पर्वत, टिकेगा अब कितने समय।


 

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