नयन आर्द्र अनंत घड़ी को,
संत्रास काल का करुणामय,
पराग लालायित हृदय मेरा,
चैतन्य अग्रसर मृगतृष्णा को,
नहीं क्षुधा व्यतित की अभिव्यक्ति
कदाचित् त्रुटि सहित मेरी हरि भक्ति
स्निग्ध चांदनी को लोलुप,
नयन शबरी के पर्याय,
श्याम रात देख देख ऊबे
पूर्णमासी आने को नयन बिछाये।
अब परिस्ज राह जोहन की शक्ति
कदाचित् त्रुटि सहित मेरी हरि भक्ति।
✍️शिवम चौधरी


