
सागर के बाहर मोती
मोती केवल सागर की,
गहराई में ही नहीं मिलते ।
कभी देखा है तुमने उनको,
सागर के बाहर भी खिलते।
कभी देखा है बारिश के बाद,
बिजली के लंबे तारो को ,
उनपर लटकती पानी की बूंदों को।
कभी देखा है कमल के पत्तों को ,
पत्तों पर दौड़ती नाचती बूंदो को ।
जद्दोजहद में सुखाते गीले बालों को,
देखा होगा हवा में कुलांचे भ
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