देश में रेल के पहिए रुके हुए हैं, यह तो सभी जानते हैं। लोग इस कारण परेशान भी हैं ,मैं भी कुछ परेशान हूं, पर मेरी परेशानी इस बात को लेकर नहीं है कि मेरी कोई रेल यात्रा का कार्यक्रम स्थगित हो गया। नहीं ऐसा कोई कारण नहीं बल्कि मेरी परेशानी तो मेरे घर के रेलवे स्टेशन समीपता से जुड़ी हुई है। दरअसल रोज सुबह 6:20 पर आने वाली साबरमती एक्सप्रेस की आवाज का बंद होना मुझे परेशान कर रहा है।यह वही आवाज है जिसने अलार्मघडी को मेरी दिनचर्या का अंग कभी बनने ही नहीं दिया। मुझे परेशान कर रहा है यह अजीब सा एकांत।रेलगाडियो के बहुत शोर होने पर जब कभी झल्लाहट सी मन में उठती थी, उस समय को याद करके आज मुझे बड़ा क्रोध आ रहा है। मुझे यह रेल के शोर के बंद होने से उत्पन्न शांति कतई रास नहीं आ रही है। मुझे इंतजार है रेल के पहियों का पटरियों पर दौड़ने का ,पटरियों का फिरसे थिरकने का ।मैं सुनना चाहती हूं रेल की सीटी की वह बहुत लंबी, थोड़ी कर्कश ,लेकिन जीवंतता से भरपूर , गतिशीलता से लवरेज वह आवाज़..............
शिवा पाठक
