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सब के हैं भंडारण दुःख के

सब के हैं भंडारण दुःख के

सब की अलग समस्या है।

चाहे करना हल हैं उसको

पर करते नहीं तपस्या है।


पीड़ाओं के सागर यहां सब ने बनाए हैं।

तूफ़ानी लहरों की चोटे सब ने खाए हैं।

हर पीड़ाओं की आहों में अलग अलग आवाजें हैं।

कुछ मन की निष्ठाएं है तो कुछ तन की सर ताजें हैं।

सब लोगों की वजह अजब निराली है,

कुछ सपनों में खोए हैं तो कुछ की रातें काली हैं।

हर जीवन के निर्मल मन में बाते यही समाई हैं।

भाग्य की रेखाओं ने मेरे सफलता नहीं लिखाई है।

सब मन की व्यथाएं ह

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