सब के हैं भंडारण दुःख के

सब की अलग समस्या है।

चाहे करना हल हैं उसको

पर करते नहीं तपस्या है।


पीड़ाओं के सागर यहां सब ने बनाए हैं।

तूफ़ानी लहरों की चोटे सब ने खाए हैं।

हर पीड़ाओं की आहों में अलग अलग आवाजें हैं।

कुछ मन की निष्ठाएं है तो कुछ तन की सर ताजें हैं।

सब लोगों की वजह अजब निराली है,

कुछ सपनों में खोए हैं तो कुछ की रातें काली हैं।

हर जीवन के निर्मल मन में बाते यही समाई हैं।

भाग्य की रेखाओं ने मेरे सफलता नहीं लिखाई है।

सब मन की व्यथाएं है ये 

सब की यही समस्या है।


कर तो रहे हैं इतना हम पर कुछ भी नहीं पाएं हैं।

हम को देखो हम भी तो उसी भीड़ से आएं हैं।

ऐसी बातें करते हैं सब विफलता को ही दिखाते हैं।

कर्मों की रेखा को झूठे भाग्यों पर ही टिकाते हैं।

हर संभव कर लिए प्रयास हम बाकी अब क्या करना है।

अब तो जीवन नहीं मिलेगा केवल अब तो मरना है।

लघु कर्मों के संघर्षों से ही सपने बड़े हम देखते हैं।

तप को न दे अधिक महत्ता जप पर खुद को रखते हैं।

मिलता जीवन को उतना ही

जितनी करते तपस्या हैं।