करना उम्मीद जिंदगी में एक गुनाह है।

हट कर चलो इससे और भी राह है।


उम्मीद में किसी के गुजारा न कीजिए।

ले शस्त्र औरों के जंग हारा न कीजिए।

हर तरफ से आंधियां है तेज चल रही,

दीपक के बातियों का सहारा न कीजिए।


जाने कब वे बुझ पड़े कोई न थाह है।

करना उम्मीद जिंदगी में एक गुनाह है।


करना भरोसा जीवन की सबसे बड़ी भूल है।

फूलों में छिपा रखना जिस तरह से शूल है।

लाखों भले ही गलतियां जीवन में हो जाएं,

लेकिन भरोसा करना गलतियों में मूल है।


जीवन के अनुभवों का मेरे यही सलाह है।

करना उम्मीद जिंदगी में एक गुनाह है।


निर्भर न रहना किसी के नक्शे कदम पर।

चलना सदा अपने ही पैरों के दम पर।

जो रास्ते यहां औरो ने बना रखे हैं,

उन रास्तों में उलझने हैं हर सितम पर।


पाने को लक्ष्य यदि जीवन में चाह है।

करना उम्मीद जिंदगी में एक गुनाह है।


बंदूक चलती है नहीं औरों के कंधो पर।

व्यापार भी होता नहीं है औरों के धंधों पर।

जब मंजिले चुनोगे स्वयं के हिसाब से,

तो रास्तों का निर्णय छोड़ना क्यों अंधो पर।


जब मन में पाने की कुछ बड़ी उछाह है।

करना उम्मीद जिंदगी में एक गुनाह है।


जो लोग जी रहे हैं उम्मीद को ले साथ।

उनके लगेगा यहां पर कुछ भी न हाथ।

जो मान लिए हैं जीवन में हार को,

इंसान से करके उम्मीद माने उन्हें है नाथ।


जीवन के रास्तों से वे हुए गुमराह है।

करना उम्मीद जिंदगी में एक गुनाह है।