हवा में खुमारी है मौसम ने ली अंगड़ाई है
फागुन में होने वाली कामदेव की सगाई है।
कलियाँ पराग से भरी, भ्रमरों की भरमार
दुविधा में गोरी पड़ी कब आएँगे भरतार ।
गाँव गाँव शहर दर शहर देखो फागुन का तेवर
वन उपवन मधुवन लागे , बुड़वा लागे देवर ।
काम क्रोध मद लोभ से जीवन भया बदरंग
राग अनुराग विराग से कर लो जीवन सबरंग ।
सतरंगा है इंद्रधनुष , है सप्तसुरी संगीत
दुनिया सतरंगी दिखे , जब मिल जाए मनमीत ।
रंगो की रंगत , हमजोली की संगत , मौसम अलमस्त है ,
मन ने कहा जिसका मन मस्त है उसके पास समस्त है ।
बसा ले तन-मन राधा-माधव की बस्ती में ,
मिटा दे अपनी हस्ती , फागुन की मस्ती में ।
