तुम नहीं जानते मेरा इंतज़ार
तुमने कहां देखे मेरे आंसू
मैं मुस्कुराती हुई,तुम्हारे पास से गुजरती रही
तुमने कभी नहीं पूछा कैसी हो तुम?
मैं तुम्हारी फिक्र में पिघलती रही
और तुम दिन पर दिन पत्थर होते चले गए
मैंने दुआओं में मांगा तुम्हें
तुमने खुदा को इंकार कर दिया
~शैली