पुरानी तस्वीरों में देखकर

वो मुझसे हर बार नया सा इश्क़ करता है!


बदली हुई नज़रों में जाने कैसे ढूंढ लेता है वो

कोरों में जमे आंसू में अपनी सजी हुई सी शक्ल 


ज़ुल्फ़ें जो अब मैं बाँधने लगी हूँ वो उस जुड़े में भी ढूंढ लेता है 

हमारे वो दिन, वो सांस, वो बात और पल जिसमें थी हमारी वस्ल


मैं अब नहीं पहनती झुमके लेकिन वो चुम लेता है कानों को 

जैसे हो ये कोई पुरानी रस्म 


पुरानी तस्वीरों में देखकर

वो मुझसे हर बार नया सा इश्क़ करता है!