आज कोशिश की
खुद को देखने की
वक्त के आइने पर
परतें मिलीं हैं धूल की
अरसा हुआ देखे हुए
धुंधला गई है अब
तस्वीर भी मेरी
कुछ पन्नों के बीच
रह गई है जैसे
पंखुड़ी दबी हुई सी
किसी फूल की
डोर थाम रखी है
टूटती सी याद की
देख लूं खुद को फिर
आस इसी आस की
इस आस में ही
भर गईं हर सांस में
परतें उड़ीं जो धूल की
