ये आँखे क्या कहती है 

ये तुम ही जानो,

ये किसे ढूंढती है 

उसे पहचानो,

कभी इनमे प्यार है 

तो कभी छलावा है, 

किसपे यकीन करे 

वो अक्सर हमसे पूछते है, 

आपकी ही मर्जी है 

जिनपे आप यकीन करे,

मेरी आँखे तो बस

आपको ही ढूंढती है ।