वो समझते तो है मेरे प्यार को

पर कद्र वो करते नही,

बेफजूल की बाते करते

अक्सर वो समझते नही,

है यकीन उनको मेरे प्यार पे मगर,

एक मौका भी वो

हमको कभी देते नही,

जोर आजमाइश है

उनसे इश्क करने की,

पर वो मेरे जज्बातो की

कद्र ही करते नही ,

मैंने भी है ठानी

एकदिन करेंगे वो हमसे ही मोहब्बत,

अब कर रहे है हम वक्त का सब्र,

या तो करेंगे वो इजहार

या बरसेंगे हमपे बनके कहर