पिता एक विशालकाय वृक्ष के समान है
जिसके छांव मे बच्चे खेलते हुए आगे बढ़ते है,
एक वक्त के बात जब वृक्ष सूख जाता है
तो उस सूखे हुए वृक्ष से बच्चे ऐसे दूर हो जाते है
जैसे चिड़िया अपने घोंसले छोड़ जाते है,
और बूढ़ा वृक्ष उन चिड़ियो को पनीली आँखो से
खुद से दूर जाता हुआ देखता है ।


