तुम जो इतना हंसती हो,
किस गम से इतना जूझती हो,
अपनी हंसी में छुपे दर्द को छुपाती हो,
किस से तुम आँख चुराती हो,
तेरे दर्द को मैं पहचानता हूँ,
तुझे बचपन से मैं जानता हूँ ।


तुम जो इतना हंसती हो,
किस गम से इतना जूझती हो,
अपनी हंसी में छुपे दर्द को छुपाती हो,
किस से तुम आँख चुराती हो,
तेरे दर्द को मैं पहचानता हूँ,
तुझे बचपन से मैं जानता हूँ ।