भले लोग प्रशंसा पाने के लिए अच्छे काम नहीं करते वो बिना तारीफ के उम्मीद रखते हैं यही उनकी असली पहचान भी है कहते हैं न कि अंधेरे में ही तारे दिखते हैं।