मैं अक्सर जब खुद के बारे में
अत्यधिक सोचता हूँ तो
सर में दर्द होने लगता है,
क्या जिंदगी को ऐसे
सोचकर जिया जा सकता है!
नहीं
बिल्कुल भी नहीं
जिंदगी एक बहती धारा के समान है,
जो हो रहा है
बस उसके साथ बहते रहना ही
जिंदगी है ।
मैं अक्सर जब खुद के बारे में
अत्यधिक सोचता हूँ तो
सर में दर्द होने लगता है,
क्या जिंदगी को ऐसे
सोचकर जिया जा सकता है!
नहीं
बिल्कुल भी नहीं
जिंदगी एक बहती धारा के समान है,
जो हो रहा है
बस उसके साथ बहते रहना ही
जिंदगी है ।