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पुकार


उनकी राहें तकते तकते आँखे पथरा गई,साथ देने को मेघा भी बरस गई,बीत गए अब तो सावन भादो,सखी तुम भी लौट आओपरदेश को हमरे लिए छोड़ के आओ ।

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