राहुल और प्रीति पड़ोसी है। वे दोनो एकदूसरे से प्यार करते है पर अभी तक उन्होने ये बात अपने अपने घरवालो से छिपाकर रखी है। उनके घरवालो के बीच अक्सर लड़ाईयां होती रहती है। शुरुआत के दिनो में इन दोनो में भी परिवार की वजह से लड़ाईयां हो जाती थी। फिर धीरे-धीरे दोनो को एक दूसरे की खूबियां दिखी और दोनो एकदूसरे से प्यार करने लगे। प्रीति ने सबसे पहले अपने प्यार का इजहार राहुल से किया था। अब दोनो शादी करना चाहते है पर परिवारवालो को मनायेगा कौन इस बात से प्रीति राहुल से नाराज है। 

       

वो दोनो एक रिहायशी इलाके में रहते है। एक दिन दूधवाला जब घंटी बजाता है तो दोनो अपने अपने घर से बाहर आते है। प्रीति दूध का पैकेट लेकर राहुल की ओर बिना देखे मुंह मोड़कर घर के अंदर चली जाती है। वैसे तो राहुल घर का कोई भी काम नहीं करता था उपर से लेट लतीफ सोकर जगने वालो मे से था पर जबसे उसे प्रीति से प्यार हुआ था वो हर काम करता जिन कामो की वजह से वो प्रीति से मिल पाये जिनमें से ये दूध का पैकेट लेकर आना भी था। 

       

राहुल जानता था कि प्रीति थोड़ी जिद्दी है। वो तब तक नहीं मानेगी जब तक वो शादी के लिए घरवाले को ना मना ले। राहुल ने घरवालो को मनाने का एक उपाय निकाला। वो गुड बॉय बनकर घर के सारे काम करने लगा। माँ को मनाने के लिए वो किचेन में माँ की मदद करता। पापा को खुश करने के लिए उनकी कार को साफ करता। बहन को परेशान करना तक उसने छोड़ दिया। 

जब उसे लगा कि घरवाले अफ उससे खुश रहने लगे है तो एकदिन वो खाने के टेबल पे अपनी बात कहता है - "पापा मैं प्रीति से प्यार करता हूँ मुझे उससे शादी करना है ।"

पापा ये सुनकर गुस्सा हो जाते हैं। 

कहते है 'तुम्हे पता भी है वो हमारे अराइवल्स है मैं उन्हे ये मौका नहीं दे सकता।'

माँ भी बीच मे बोल पड़ती है "मिसेज चौधरी को मैं भी खूब अच्छे से जानती हूँ। वो एकदम नकचढ़ी है। किसी की इज्जत भी नहीं करती। उसदिन सोसायटी के गेट पे सो रहे गार्ड को ऐसे डाँट रही थी जैसे पूरी की पूरी सोसायटी उसी की हो, खुद को सोसायटी की प्रेसिडेंट समझती फिरती है। फिर क्या था मैंने भी खूब अच्छा सबक सिखाया था। राहुल अपना सर थामे वहीं कुर्सी पे बैठ गया। उसने सोचा अगर मैं अपने ही परिवार को अभी तक कन्वेंस नहीं कर पाया हूँ अभी तो मुझे प्रीति के परिवार को भी कन्वेंस करना है। 


   कुछ देर बाद राहुल के पापा कुछ सोचकर कहते है "अगर तुम अपनी ये फालतू के फोटोग्राफी को छोड़कर मेरे बिजनेस मे मेरा साथ दो तो मैं कुछ सोच सकता हूँ।"


राहुल को फोटोग्राफी से बेहद प्यार था। वो अपना करियर फोटोग्राफी में बनाना चाहता था पर वो प्रीति से भी बहुत प्यार करता था। वो मान गया। पापा ने कल से ही ऑफिस आने का ऑर्डर दे दिया। बेचारा राहुल क्या करता वो प्रीति के प्यार के आगे हर शर्त मानने को तैयार था।


रात को वो दोनो अक्सर छत पे मिलते थे। उन दोनो ने रूल्स बनाए थे कि चाहे कितनी भी लड़ाई हो जाए हम दोनो में, हम छत पर मिला करेंगे और एकदूसरे को देखे बिना तो बिल्कुल नहीं सोयेंगे चाहे हमदोनों ने बात करना ही क्यों न बंद कर दिया हो।

आज जब दोनो छत पर मिले तो राहुल ने आज जो कुछ भी घर में हुआ था वो सारी बाते प्रीति को बता दिया।

प्रीति ये सुनकर खुश हो गई | वो उसके गले से लग गई। राहुल बोला मेरे मम्मी-पापा तो मान गए पर तुमने अपने मम्मी-पापा को मनाया कि नहीं।

प्रीति बोली - मेरे परिवार वालो को भी तुम ही मनाओगे ।

राहुल ने कहा - ठीक है बाबा मैं ही मनाऊँगा।

कुछ देर दोनो साथ मे ही बैठे रहे फिर अपने अपने घर चले गए ।


राहुल घर मे आने के बाद सोफे पे ही बैठ गया। वो सोच रहा था मैं कैसे मनाऊँगा प्रीति के मम्मी-पापा को। ऊपर से मेरे घरवाले उनसे लड़ाई का एक मौका तक नहीं छोड़ते।

राहुल सोच ही रहा था कि उसकी बहन उसके पास आयी। अपने भाई को यूं गहरी सोच में डूबा देखकर वो उसके पास ही बैठ गयी। उसने राहुल को हिलाया तो वो सोच से बाहर आया। भाई को यूं परेशान होता देखकर माही ने उसे कुछ आइडिया दिया जिससे प्रीति के घरवाले मान जाए।

ये सुनकर राहुल माही को गले से लगा लेता है। 

वो कहता है - "मुझे तो पता ही नही चला मेरी बहन कब इतनी बड़ी हो गई मैं तो तुझे बेवकूफ समझता था।

ये सुनकर माही बोली - क्या आप मुझे बेवकूफ समझते थे। वो दोनो पास रखे तकिये को लेकर एकदूसरे को मारने लगे। जब थक गए तो सोफे पर बैठकर दोनो एकदूसरे को देखकर  हंसने लगे। 


अगले दिन से राहुल मिशन चौधरी पे काम करना शुरू कर देता है। वो ऑफिस के लिए निकलता है। प्लान के मुताबिक माही मिस्टर चौधरी के कार की हवा निकाल देती है। मिस्टर चौधरी टैक्सी का इंतजार कर रहे है। राहुल मौके का फायदा उठाते हुए उनके सामने जाकर अपनी बाइक रोक देता है और मिस्टर चौधरी को लिफ्ट के लिए पूछता है। पहले तो वो मना कर देते है फिर टैक्सी मिलने मे देर होने की वजह से वो मान जाते है। राहुल उन्हे उनके ऑफिस तक छोड़ने जाता है। रास्ते भर वो उनसे बाते करने की कोशिश करता रहा पर मिस्टर चौधरी ज्यादा कुछ बोल ही नहीं रहे थे। 

मिस्टर चौधरी को ऑफिस छोड़कर वो पापा के ऑफिस पहुंचता है। पापा उसे देखकर बेहथ खुश होते है। अब वो पापा के साथ ही उनके ऑफिस में काम करने लगता है।

माही रोज मिस्टर चौधरी के कार की हवा निकाल देती और राहुल उन्हे लिफ्ट देता। अब दोनो अच्छे दोस्त बन गए। मिस्टर चौधरी तो अब दोस्त बन ही गए थे अब मिसेज चौधरी को खुश करने की बारी थी।


माही ने राहुल को बताया कि मिसेज चौधरी को गलत काम करने वाले लोग बिल्कुल भी नहीं पसंद है।

अब जैसे कुछ दिन पहले गार्ड अंकल ड्यूटी पे सो रहे थे। उन्हें सोता हुआ देखकर मिसेज चौधरी को गुस्सा आ गया ।उन्होंने गार्ड को डाँटना शुरू कर दिया। तभी अपनी मम्मी वहां पहुंच गई। उन्होंने मिसेज चौधरी को गार्ड को डाँटते देखकर खुद उनसे लड़ना शुरू कर दी थी। 

ये सब सुनकर राहुल सब कुछ समझ गया। अगला प्लान तैयार था। 

एक दिन राहुल सोसायटी के गेट पे सब्जी ले रहा था । उसने मिसेज चौधरी को आते देखा। 

उसने सबजीवाले से कहा - क्या भैया एक तो आप सब्जी अच्छी बेचते भी नही ऊपर से इनके दाम को इतना बढ़ा चढ़ाकर बता रहे है। 

ये सुनते ही मिसेज चौधरी सब्जी वाले के पास आ गयी। अब दोनो मिलकर सब्जीवाले से लड़ रहे थे। सब्जीवाला डर ही गया। वो अपनी सब्जी का ठेला लेकर चला गया।

वो जाते जाते बड़बड़ाता हुआ जा रहा था - अब से इस सोसायटी के पास मै अपना ठेला नही लगाऊंगा।

मिसेज चौधरी यह सुनकर कहती है - हां अगर नजर भी आये तो देख लेना मैं क्या करती हूँ ।

उसके जाने के बाद दोनो खूब हँसे। अब हर दिन राहुल और मिसेज चौधरी साथ मे ही सब्जी लेने जाने लगे। ऐसे ही वो दोनो दोस्त बन गये। एकदिन मिस्टर चौधरी ने राहुल को खाने पे बुलाया। वो मान गया। उसने खाने पे आने का बुलावा स्वीकार कर लिया। 

ऐसे कैसे वो मना कर देता वो तो कबसे इस दिन का ही इंतजार कर रहा था।

उस रात जब राहुल और प्रीति छत पर मिले तो 

प्रीति ने राहुल से कहा - अरे वाह तुम तो फोटोग्राफी के साथ साथ एक्टिंग भी बहुत अच्छे से कर लेते हो। 

राहुल ने पूछा - तुम्हे कैसे पता ?

प्रीति ने कहा - तुमने उसदिन सब्जीवाले से जो झूठी लड़ाई शुरू की थी उस वक्त मै बालकनी से तुम्हे ही देख रही थी ।राहुल हंसते हुए बोला - हां ये सब प्लान तो माही ने किया था। उसने सारी घटना प्रीति को बताया कि कैसे माही उसके पापा के कार की हवा निकाल देती थी और वो उन्हे लिफ्ट ऑफर करता था और फिर सब्जीवाले से लड़ाई वाला आइडिया भी तो माही ने ही दिया था।

दोनो हंसने लगे।

राहुल ने कहा- अब तुम्हारे मम्मी और पापा दोनो मेरे अच्छे दोस्त है। उन्होंने मुझे खाने पे बुलाया भी है।

प्रीति नेकहा - ये तो बहुत अच्छी बात है। लगता है अब वक्त आ गया है। तुम जब खाने पर आओगे तो मेरा हाथ मांग लेना।

राहुल ने हामी भर दी।

दोनो अपने अपने घर चले गए।

अगले दिन राहुल प्रीति के घर गया ।

दरवाजा मिसेज चौधरी ने खोला ।

अरे बेटा तुम यहाँ। 

अंदर आओ ना।

राहुल अंदर चला गया।

उसने फूलो वाला बुके और चॉकलेट का बॉक्स आंटी को दे दिया। वो उसे अंदर लेकर घर मे आयी और उसे सोफे पर बैठने को कहा। वो सामान अंदर रखने चली गई।

जब वो वापस आयी तो उन्होने अंकल को आवाज दिया - कहाँ है आप ?

देखिये मेरा दोस्त आया है।

मिस्टर चौधरी कमरे से बाहर आये ।

उन्होने आते ही कहा - तुम आ गए।

मिसेज चौधरी ये देखकर हैरान थी।

उन्होने पूछा - तो तुम दोनो पहले से ही एकदूसरे को जानते हो!

मिस्टर चौधरी ने कहा - हां यह मेरा भी दोस्त है इसे मैंने ही तो खाने पे बुलाया है।

मिसेज चौधरी बोली - ओह तो आज खाने पे जो मेहमान आने वाले थे वो ये है।

मिस्टर चौधरी ने कहा - हां वो यही है।

मिसेज चौधरी बोली - अरे वाह ये कैसा इत्तेफाक है कि हमदोनो का दोस्त एक ही इंसान है। अच्छा जो भी हो बेटा तुम बहुत अच्छे इंसान हो और हमारे अच्छे दोस्त भी।

सब खाना खाने लगे।

खाने के टेबल पर अंकल ने बताया - ये मेरी बेटी है प्रीति । दोनो ने एकदूसरे को देखा और हल्का सा मुस्कुरा दिया। अभी खाना आधा ही खत्म हुआ कि प्रीति ने राहुल को इशारा किया बात शुरू करने के लिए।

राहुल ने बात शुरू किया और प्रीति का हाथ मांग लिया।

मिस्टर और मिसेज चौधरी ने मना कर दिया । वे दोनो उनके पास जाकर बैठ गये। 

राहुल ने कहा - हमदोनो एकदूसरे को पहले से ही जानते है, हम एकदूसरे से प्यार करते है , एकदूसरे के बिना नही रह सकते इसलिए हम शादी करना चाहते है ।

मिस्टर चौधरी ने प्रीति की ओर देखा ।

प्रीति ने कहा - हां पापा राहुल सच कह रहा है ।

उनकी ये सारी बाते सुनकर दोनो मान गए ।

उन्होने कहा - हमारे बच्चो से बढ़कर हमारे लिए कुछ भी नही है तुम जिसके भी साथ रहो खुश रहो हम तुम्हारे साथ है। दोनों ने उनके पांव छुए तो उन्होने दोनो को गले से लगा लिया । प्रीति कुछ मीठा ले आई। सबने मुंह

मीठा किया। सब बैठकर बाते कर रहे थे ।

मिसेज चौधरी ने राहुल से पूछा - तुम्हारे मम्मी-पापा मान गये। 

राहुल बोला - हां उन्हे मनाने के बाद ही तो आप लोगो को मनाया था।

ये सुनकर मिस्टर और मिसेज चौधरी सारी बाते जानने के लिए झूठा गुस्सा होने का दिखावा करते है। अच्छा तो तुम लोगो का ये प्लान था। 

राहुल को जब बात समझ आती है कि ये क्या बोल दिया तो वो प्रीति की ओर देखने लगता है। 

प्रीति इशारे से ही उसे समझाती है चिंता मत करो, हम सब संभाल लेंगे। 

राहुल मिसेज चौधरी के पास जाता है। 

वो कहता है - हमदोनो के परिवार के संबंध अच्छे नही थे इसलिए हमे ये सब करना पड़ा । 

मिस्टर और मिसेज चौधरी उनकी शक्ले देखकर हंसने

लगे ।

उन्होंने राहुल से कहा - अगली बार जब खाने पे आना तो अपने घरवालो को भी साथ मे लाना। हमे उनसे भी तो बाते करनी होंगी । 

अगली बार जब वो खाने पर गया तो अपने घरवालो के साथ गया। दोनो परिवारों ने मिलकर राहुल और प्रीति की शादी की तारीख तय कर दी। 

शादी के मंडप में जब राहुल और प्रीति साथ बैठे थे तब दोनो की माँ फिर से किसी बात पे एकदूसरे से बहस करने लगे ।

राहुल और प्रीति एकदूसरे को देखते है फिर अपनी माँ की ओर।

वो एकसाथ बोलते है - ये लो , ये लोग फिर से शुरू हो गए।

वे दोनो यह सुनकर उनकी ओर देखती है और दोनो हंस पड़ती है । 

राहुल की माँ कहती है अब हमलोग समधन बनने वाले है तो सोचा समधन बनने से पहले एक आखिरी बहस हो जाये।फिर दोनो हंसने लगे और गले लग गए।

राहुल और प्रीति को ये देखकर जान मे जान आयी।

फेरे हुए और शादी रीति रिवाजो के अनुसार सम्पन्न हो गया।

दोनो ने बड़ो के आशीर्वाद लिए ।

फिर दोनो एकदूसरे के गले लग जाते है और कहते है फाइनली शादी हो गई , मैं तुम्हारा और तुम मेरी हो गई ।

फोटोग्राफर आता है । दोनो परिवारो की तस्वीरे लेता है और इसतरह सब अच्छे से हो जाता है ।