ये कहानी अभी और कजरी के प्रेम की कहानी है ।

इस कहानी का मुख्य पात्र अभी है और वो ये कहानी याद कर रहा है ।

पेंडामिक टाइम है और हम (अभी) शहर जा रहे हैं। मैं शेयरिंग ऑटो में बैठा। वहाँ पहले से ही दो महिलाएँ बैठी थी । मैंने ऑटो वाले को जल्दी गाड़ी स्टार्ट करने को कहा मुझे देर हो रही भी, वो मान गया और गाड़ी चल पड़ी । आधे रास्ते मे जाते ही एक चौराहे पर पुलिस की गाड़ी खड़ी थी । पुलिस मास्क ना पहनने वाले से जुर्माना वसूल रहे थे। ऑटो वाले ने ये देखा और ऑटो साइड में लगा दिया वो बोला अब हम आगे नहीं जायेंगे आप सब अपना देख लो मुझे पुलिस के डंडे नहीं खाने है और ये कहकर वो भाग गया । मेरे साथ जो महिलाएँ ऑटो में भी थी वो थोड़ी डर गयी । वो मुझे देखने लगी। मैने उनसे पूछा आप सभी को कहाँ जाना है। उनमे से एक महिला बोली आगे चौक हैं वही से एक सड़क जाती है उनके गाँव तक । वहीं जाना था उन्हे | मैंने उनलोगो से कहा आपलोग डरे नहीं मैं आपलोगो को आपके गाँव तक छोड़ देता हूँ | करीब 45 min चलते हुए हमलोग गाँव पहुँच गए थे। जब उनका घर आया तो उन्होंने मुझसे आग्रह किया कि मैं उन्हें छोड़ने उनके घर तक आया हूँ चाय पानी पीकर ही जाऊ। मैं रूक गया उन्होंने मुझे बरामदे में बैठने को कहा मैं वहीं बैठ गया और वे दोनो अंदर घर में चली गई। मैं चारो ओर नजरे घुमाकर देखने लगा वहां कोई नजर नहीं आ रहा था । गाँव के इक्के-दुक्के लोग ही नजर आए जो मुझे घूरते हुए आगे बढ़ गए । बैठे-बैठे मेरी कमर अकड़ गयी पर अंदर से कोई बाहर नहीं आया। मैंने सोचा अब मुझे जाना चाहिए मैं जा ही रहा था कि सोचा एकबार कह देता हूँ उनसे कि मैं जा हूँ । ये कहने को मैं घर के अंदर गया तो देखा घर एकदम लाइन से थे 5 कमरे थे। मैं आगे बढ़ा आवाज दी घर से उनके बात करने की आवाज आ रही थी वो लोग अपनी ही बातो मे मशगूल थे शायद। वो भूल ही गए थे मुझे । मैंने फिर से आवाज लगाई और दूसरे कमरे के पास पहुंचा ही था कि एक लड़की कमरे से बाहर निकली और अचानक से मुझसे टकरा गई, मैंने उसे संभालने की कोशिश की और हम दोनो ही गिर गए। वो झट से उठी और अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए मुझसे पूछने लगी - जी आप कौन और ऐसे कैसे घर मे घुसे चले आ रहे है। मैं अभी कुछ कहता इससे पहले ही घर की औरते कमरे से बाहर निकल आयी और वो जो दो औरते मेरे साथ आयी थी वो बोली - अरे बेटी ये तो वही भले इंसान है जो मुझे घर तक छोड़ने आये है।

मैं उठकर खड़ा हो गया और वो लड़की अपने कमरे मे चली गई। उनलोगो ने मुझे सबसे अंतिम कमरे में चलने को कहा शायद यहाँ पढ़ाई होती होगी दीवारों पे ब्लैकबोर्ड और बच्चो की पढ़ाई के लिए पोस्टर्स टंगे थे। मैं बैठ गया। एक महिला कुछ खाने के लिए ले आयी। मैंने कहा इतना कुछ लाने की क्या जरूरत थी आंटी तो उसने कहा बेटा तुमने भी तो मेरे लिए कितना कुछ किया है आज के जमाने मे तुम जैसे भले इंसान कम ही देखने को मिलते है ।

तभी वो लड़की चाय लेकर आयी । मैंने उसे देखा वो बेहद खूबसूरत थी। हमदोनो की नजरे टकरायी और उसने अपनी पलके नीचे झुका ली मैं उसे देखता ही रह गया तभी आंटी की आवाज आयी अरे बेटा तुम तो कुछ खा ही नही रहे हो तो मैं जरा झेंप गया। उसने चाय मेज पर रखा और वो जाने लगी मैं उसे जाते हुए देखने लगा। आंटी ने उसे आवाज दी "अरे कजरी जरा रुक यहीं बैठ मेहमान के पास मुझे कुछ काम है' और वो चली गई। 

वो लड़की कुर्सी पे बैठ गई कुछ देर तक कमरे में शांति रही तब 

मैंने ही बात शुरू की - ओह तो आपका नाम कजरी 

है ।

अभी तक उसकी पलके नीचे ही थी मेरी बात सुनकर उसकी पलके उठी और उसने जवाब दिया 'जी मेरा नाम काजल है घरवाले प्यार से कजरी बुलाते है। '

फिर उसने मुझसे पूछा - आपका क्या नाम है?

मैंने उसकी ओर देखा और कहा- मेरा नाम अभिराम है और सब अभी बुलाते है ।

उसने फिर पूछा - आपका घर कहाँ है?

मैंने कहा- पटना

वो मेरी ओर देखकर बोली ओह तो आप पटना से आए है। 

मैंने कहा - हां मैं पटना से आया हूँ, मैं एक सरकारी ऑफिसर हूँ, पास के गाँव मे कुछ सर्वे था वही करने आया था और फिर शहर जा रहा था तो आपके घरवालो को परेशान देखा और उन्हें छोड़ने यहाँ तक चला आया ।

उस लड़की ने मन ही मना सोचा लड़का देखने में भी अच्छा है नेक दिल इंसान है लोगो की मदद करता है। हमारी बाते होते होते नाश्ता भी हो गया। अब मैं जाने को तैयार था वो मुझे छोड़ने दरवाजे तक आयी। जब से उसे देखा था दिल कहीं और लग ही नही रहा था मुझे उससे पहली नजर मे ही प्यार हो गया और अब ये शरारती नजरे बस उसे ही देखना चाहती थी। 

पर ऐसा मुमकिन नहीं था। मैंने दरवाजे पे उसे एक नजर जी भर कर देखा और उससे अलविदा ले ही रहा था कि उसके पिताजी आये और उससे पूछने लगे - बेटी ये आदमी कौन है तो उसने अपने पिता को घर मे चलने को कहा उसके पिता मुझे बाहर रूकने को कहकर घर मे चले गए। मैं फिर वही बरामदे मे बैठ गया। वो अंदर जाकर अपने पिता को सारी बाते बताने लगी। सारी बाते सुनकर उसके पिता बाहर आये और उन्होने मुझसे कहा - अरे बेटा तुम्हारा बहुत शुक्रिया तुमने मेरे घरवालो के लिए इतना कुछ किया। फिर उन्हे अचानक कुछ याद आया और उन्होंने मुझसे कहा अरे बेटा मैं अभी अभी बाजार की तरफ से आ रहा हूँ, लोगों को कहते सुना था कि सारी बाजारे बंद करवाने पुलिस आने वाली है। अगर आपको कोई तकलीफ ना हो तो आप आज रात भर के लिए यही रूक जाइये ।

मैंने कुछ सोचा और कहा पर मुझे तो शहर जाना ही होगा बहुत जरूरी काम है तो उन्होने कहा पर जाओगे कैसे सारी गाड़ियां तो पुलिस ने बंद करवा दी है,कल सुबह चले जाना सुबह पुलिस नहीं होते है । 

मैं कुछ सोचने लगा तो उन्होने कहा रात भर की ही तो बात है सुबह घर चले जाना । मैं भी क्या करता मैंने रुकने की हामी भर दी ।

अचानक से मेरी नजर दरवाजे के पीछे छुपी कजरी पर गई जो हमलोगो की बाते सुन रही थी। हमदोनों की नजरे टकरायी और वो शरमाकर घर मे चली गई ।दोपहर का खाना मैंने कजरी के घर पर ही खाया। खाना कजरी परोस रही थी वो जब जब आती थी मेरे सामने दिल में हलचल सी होने लगती भी मैं अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रहा था । खाने के बाद कजरी के पिताजी और मै बहुत देर तक बाते करते रहे। अंकल मुझे आराम करने को कहकर खेत की ओर चले गए ।अंदर से आंटी आई उन्होंने मुझे घर मे आने को कहा। मैं घर में गया और जैसा मैंने पहले भी बताया था कि उनके घर के सारे कमरे एकलाइन से थे। उन्होंने मुझे पहले कमरे मे रूकने को कहा ।उन्होंने मुझे आराम करने को कहा और कमरे से बाहर चली गई । मैंने कमरे को एकनजर देखा और बिछावन पर जाकर लेट गया । चलते चलते थक गया था लेटते ही मुझे नींद आ गई । मेरी नींद शोर से खुली। मैंने बाहर जाकर देखा तो कोई ब्लैकबोर्ड पे कुछ लिख रहा था । किसी लड़की की आवाज आ रही थी । बच्चो को क ख ग घ पढ़ा रही थी । ये तो कजरी की आवाज थी। मेरे कदम उस ओर बढ़ गए। जैसे ही मै कमरे में दाखिल हुआ वो मेरे कदमो की आहप सुनकर पलटी ही थी कि उसका पांव लड़खड़ाया और वो गिरने लगी मैं दौड़ा और उसे थाम लिया सारे बच्चे ये देखकर हंसने लगे। तभी एक जोरदार आवाज आई शांत हो जाओ सब। मैंने उसे उठाते हुए कहा- तुम हरदम गिरती पड़ती ही रहती हो क्या तो वो झेप गयी। उसके अंकल नजदीक आए और कजरी से उन्होंने पूछा तुम ठीक तो हो वो हां कहकर आगे बढ़ गई । अब वो मेरे पास आये और मुझसे पूछा आपको कुछ चाहिए था ।

मैंने कहा - नहीं मैं तो शोर सुनकर यहाँ चला आया 

था । उन्होंने कुछ देर मुझसे बाते की मुझे शुक्रिया कहा और पढ़ाने चले गए। रात को सबने साथ खाना खाया। खाकर वो लोग टहल रहे थे। मैं भी उन्ही के साथ टहलने लगा तभी मुझे फोन आया। मैंने बात की तो पता चला कि कल मुझे इस गाँव का सर्वे करना है। मैंने यः बात अंकल को बताया तो उन्होने मुझसे कहा आप जितने दिन भी इस गाँव मे रहेंगे हमारे मेहमान रहेंगे आपको किसी बात की फिक्र करने की जरूरत नही है । सब सोने चले गए मैं भी कमरे मे आ गया ।मै सोच रहा था कि अरे वाह ये तो कमाल ही हो गया मुझे इस गाँव मे काम मिल गया मै कुछ और दिन यहाँ रह सकता हूँ। मैं ये सब सोच ही रहा था कि मेरी नजर दरवाजे पे गयी जहाँ से कजरी मुझे एकटक देख रही थी । मैं हड़बड़ी मे उठा और उसे अंदर आने को कहा वो शर्माते हुए अंदर आयी और दूध का ग्लास मेरे आगे बढ़ा दिया और बोली माँ ने आपके लिए दूध भिजवाया है। वो जाने लगी तो मैंने उठकर उसका हाथ थाम लिया जो शोर मेरे दिल में थी वो कजरी के दिल में भी थी । उसे भी मुझसे पहली नजर वाला प्यार हो गया। वो अपना हाथ मुझसे छुड़ा कर बिछावन के एक कोने पर बैठ गयी। मैंने उससे कहा तुम बाहर क्यो खड़ी थी अंदर आना चाहिए था न। उस रात हम दोनो सुबह होने तक एक-दूसरे से बाते करते रहे थे । सुबह नाश्ते के समय उसके पिताजी बार बार मुझे देख रहे थे । फिर उन्होंने मुझसे पूछा - बेटा आपकी शादी हो गई है ? 

मैंने कहा - नहीं अंकल अभी तक तो नहीं हुई है। उन्होंने कहा - तो क्या इरादा है ? 

मैं ये सुनकर मुस्कुरा दिया।

वो धीरे से बोले मेरी कजरी से शादी करोगे? 

मै शर्मा गया।

तो उन्होने कहा - मैंने रात को देखा था तुम दोनो को बात करते हुए ।

मैं ये सुनकर झेंप गया । 

उन्होंने कहा - बेटा इस बारे मे सोचना जरूर ।

नाश्ते के बाद मै गाँव का सर्वे करने चला गया पर मेरा दिल काम मे नही लग रहा था । मै बार बार कजरी के पिता की कही बाते याद कर रहा था । शाम को जब मै घर पहुंचा तो देखा घर के सारे लोग बरामदे मे बैठे कुछ बाते कर रहे थे । मै बरामदे मे पहुंचा तो कजरी के अंकल ने मुझे बैठने को कहा । आंटी मेरे लिए पानी ले आयी मैंने पानी पीया फिर कजरी के अंकल ने मुझसे पूछा - तो भाईसाहब के बातों के बारे मे तुमने क्या सोचा है?

मैंने कहा - मै कुछ समझा नहीं। 

उन्होंने कहा तुम लोग रातभर जो बातें कर रहे थे वो सारे घरवालो को पता चल गया है इससे पहले कि गाँववालो को कुछ पता चले, हमारी बेइज्जती हो,

तुम अपना फैसला हमे बता दो । 

मैं कुछ देर सोचने लगा 'मम्मी पापा से क्या कहूंगा काम करने गया था और साथ मे बहु लेकर लौटा हूँ,

वो तो मुझसे नाराज होंगे, आखिर इकलौता बेटा हूँ मै उनका, उनकी भी तो ख्वाहिशे होंगी मेरे शादी की। 

मैं सोच ही रहा था कि अंकल ने कांधे पर हाथ रखा और मैं सोच से वर्तमान मे आ गया ।

उन्होंने फिर से पूछा - तो क्या फैसला है तुम्हारा। 

मैंने वहां पे मौजूद सारे लोगो को एकनजर देखा और अपना फैसला सुनाने लगा - हां मुझे कजरी पसंद है मै शादी करने के लिए तैयार हूँ पर मै इस गाँव मे अब बस दो दिन तक ही रहने वाला हूँ ।

ये सुनकर अंकल ने कहा - अरे बेटा तुम चिंतित क्यो होते हो सब हो जायेगा। तो ये तय हुआ कि परसो तुम्हारी शादी हमारी कजरी से होगी। घर के सब लोग खुश हो गए और अपने अपने कामो मे मशगूल हो गए। मौका पाते ही कजरी मेरे पास आयी और मेरे गले से लग गई मैंने भी उसे अपनी बाहो मे भर लिया तभी अंकल आए वो खांसने लगे कजरी शर्मा गयी और अंदर चली गई । रात को खाने के बाद कजरी के पिताजी ने मुझसे अपने साथ चलने को कहा ।

मै बिना कुछ कहे उनके साथ चल पड़ा। हमलोग गाँव के तालाब के किनारे बैठ गए। उन्होंन मुझसे मेरे बारे मे, घरवालो नाते रिश्तेदारो के बारे मे पूछा ।

उन्होंने कहा मुझे तो तुम पहली नजर मे अच्छे इंसान लगे थे। मैं कजरी के लिए बिल्कुल तुम्हारी तरह ही लड़का ढूंढ रहा था। जो मेरी कजरी को हमेशा खुश रख सके । 

उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथो मे थामकर मुझसे पूछा बेटा तुम कजरी का ख्याल तो रखोगे ना। वो हमारे जिगर का टुकड़ा है उसे कोई गम तो नही होने दोगे ना?

मैंने अंकल के हाथो को थोड़ा और कस कर थाम लिया और कहा - जी अंकल आप फिक्र ना करे मै कजरी का हमेशा ख्याल रखूंगा, उसे कोई तकलीफ नही होने दूंगा, उसे हमेशा खुश रखूंगा ।

कुछ देर हमलोग यूं ही शांत बैठे रहे। बैठे-बैठे मै सपने बुनने लगा - काश मै अगर कुछ दिन और यहाँ रहता तो कजरी के साथ इस तालाब के किनारे जरूर आता हम दोनो एक साथ यहाँ बैठते और ढेर सारी बाते करते ।

तभी अंकल ने मुझे जगाया चलो बेटा अब घर चलते है बहुत रात हो गई है ।

हमलोग घर आ गए मै बिछावन पे जाते ही सो गया । आधी रात को कजरी मेरे कमरे मे आयी और मुझे जगाया । वो मुझे अपने साथ ले जाने लगी मैंने उससे पूछा इतनी रात को हमलोग कहाँ जा रहे है तो उसने कहा तुम्हे मुझपे यकीन है न। 

मैंने हां में सर हिलाया। 

उसने कहा तो चुपचाप चलो मेरे साथ।

वो मेरा हाथ थामे वहीं तालाब के किनारे ले आयी हमदोनो वहां बैठ गए।

मैंने उसकी ओर सवालिया नजरो से देखा तो उसने कहा मै सपना देख रही थी कि हमदोनो तालाब के किनारे एकसाथ बैठे है इसलिए मैं तुम्हे यहां ले आई | हमदोनो ने ढेर सारी बाते की। रात जैसे जैसे गहरी हो रही थी ठंड बढ़ रही थी। मैने कजरी से घर चलने कॅ कहा तो उसने मेरा हाथ पकड़कर खुद के पास बिठा लिया और कहा थोड़ी देर और रूकते है ना देखो मौसम कितना अच्छा है। 

मुझे ठंड लग रही थी तो कजरी ने अपना शॉल मेरी ओर बढ़ा दिया । कुछ सोचकर मैंने शॉल आधी आधी ओढ ली। हमदोनो वहाँ सुबह होने तक एक दूसरे के साथ बैठे रहे वो मेरे कांधे पर ही सर रखकर सो गयी थी और मैं रातभर उसे देखता रहा पता नही कब मेरो भी आँख लग गई । चिड़ियो की चहचहाहट से हमारी आँखे खुली फिर हमलोग घर वापस आ गए ।

जैसा कि तय हुआ था हमारी शादी हो गई । मैं शहर लौट आया अपनी पत्नी के साथ । मम्मी पापा को पता तो उन्होने जोर-शोर से अपनी बहु का स्वागत किया।

मैंने जैसा सोचा था कि वो मुझसे नाराज होंगे वैसा कुछ भी नही हुआ ।

आज हम दोनो के शादी के 1साल हो गये और हमारे जुड़वे बच्चे है जिनका नाम हमने बड़े पयार से अन्नी और रॉनी रखा है । हमदोनो एकदूसरे के साथ बेहद खुश है और अपनी जिंदगी हंसी खुशी से गुजार रहे है ।