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मानसून


मानसून चढ़ाबरखा आईघनघोर बादल घिर आयेगर्जन करती बादल गरजीगर्जन से शंखनाद हुआ,अब कभी भी बरस पड़ेगा बादलशोर मचाते आया बादलबिजली कड़कीबरखा बरसीमौसम भी माकूल हुआचारो तरफ फैली हरियालीदेख इसे मन मंत्रमुग्ध हुआ ।

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