मानसून चढ़ा
बरखा आई
घनघोर बादल घिर आये
गर्जन करती बादल गरजी
गर्जन से शंखनाद हुआ,
अब कभी भी बरस पड़ेगा बादल
शोर मचाते आया बादल
बिजली कड़की
बरखा बरसी
मौसम भी माकूल हुआ
चारो तरफ फैली हरियाली
देख इसे मन मंत्रमुग्ध हुआ ।


मानसून चढ़ा
बरखा आई
घनघोर बादल घिर आये
गर्जन करती बादल गरजी
गर्जन से शंखनाद हुआ,
अब कभी भी बरस पड़ेगा बादल
शोर मचाते आया बादल
बिजली कड़की
बरखा बरसी
मौसम भी माकूल हुआ
चारो तरफ फैली हरियाली
देख इसे मन मंत्रमुग्ध हुआ ।